मेहनती गिलहरी और जादुई बीज
एक घने जंगल में चिंकी नाम की एक छोटी गिलहरी रहती थी। वह बहुत मेहनती और समझदार थी। पूरे जंगल में सर्दियों की तैयारी चल रही थी। सभी जानवर खाने-पीने का सामान इकट्ठा करने में लगे थे।
एक दिन चिंकी को रास्ते में एक बूढ़ा कछुआ मिला। कछुआ बहुत थका हुआ था और उसके हाथ से एक छोटा-सा सुनहरा बीज गिर गया।
चिंकी ने तुरंत बीज उठाकर कछुए को वापस दे दिया। कछुए ने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटी, तुम्हारी ईमानदारी से मैं बहुत खुश हूँ। यह साधारण बीज नहीं, बल्कि जादुई बीज है। इसे प्यार और मेहनत से लगाओ, यह तुम्हें अच्छा फल देगा।”
चिंकी ने बीज को अपने घर के पास बो दिया। वह रोज उसे पानी देती और उसकी देखभाल करती। कुछ दिनों बाद वहाँ एक सुंदर पेड़ उग आया, जिस पर मीठे और स्वादिष्ट फल लगे थे।
जंगल के दूसरे जानवर हैरान थे। कुछ जानवरों ने बिना मेहनत किए उस पेड़ से फल तोड़ने की कोशिश की, लेकिन फल उनके हाथ में आते ही गायब हो जाते थे।
तभी बूढ़ा कछुआ फिर आया और बोला, “यह जादुई पेड़ केवल उसी को फल देता है जो ईमानदार और मेहनती होता है।”
चिंकी ने उन फलों को अपने दोस्तों के साथ बाँट लिया। धीरे-धीरे सभी जानवरों ने मेहनत और ईमानदारी का महत्व समझ लिया।
उस दिन के बाद पूरे जंगल में सब मिल-जुलकर रहने लगे और कभी किसी के साथ धोखा नहीं किया।
शिक्षा:
मेहनत और ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।
