पंचतंत्र की कहानी: चतुर खरगोश और लालची शेर की कहानी

पंचतंत्र की कहानी का चित्र: शेर और खरगोश कुएँ के पास
पंचतंत्र की कहानी का चित्र: शेर और खरगोश कुएँ के पास

बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक लालची शेर रहता था। वह जंगल के सभी जानवरों को डराकर रोज़ किसी न किसी को अपना शिकार बना लेता। यह समस्या इतनी बड़ी हो गई कि सभी जानवरों ने मिलकर शेर से समझौता किया कि वे उसे हर दिन एक जानवर भेज देंगे, बशर्ते वह अन्य जानवरों को परेशान न करे।

खरगोश की चालाकी

एक दिन जंगल के सबसे छोटे जानवर, एक चतुर खरगोश, की बारी आई। खरगोश ने सोचा, “अगर हम हर दिन शेर को खाना देते रहे, तो वह पूरे जंगल को खत्म कर देगा।” उसने एक योजना बनाई और जान-बूझकर शेर के पास देर से पहुँचा।

गुस्से में शेर ने गरजते हुए पूछा, “तुम इतनी देर क्यों आए?”

खरगोश ने आदर से कहा, “महाराज, मैं तो समय पर आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक और शेर ने मुझे पकड़ लिया। उसने कहा कि वह इस जंगल का असली राजा है।”

लालच का अंत

शेर यह सुनते ही आग-बबूला हो गया और बोला, “मुझे तुरंत उस नकली शेर के पास ले चलो!”

चतुर खरगोश शेर को एक गहरे कुएँ के पास ले गया और कहा, “वह शेर इसी कुएँ में रहता है।”

लालची शेर कुएँ में झाँकने लगा और उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी। उसने सोचा कि कुएँ में दूसरा शेर है। गुस्से में उसने छलांग लगाई और कुएँ में गिरकर डूब गया।

इस तरह, चतुर खरगोश ने अपनी चतुराई से जंगल के सभी जानवरों को शेर के आतंक से बचा लिया।


कहानी की सीख | पंचतंत्र की नैतिक कहानियाँ 

  1. कठिन समय में चतुराई और संयम से काम लेना चाहिए।
  2. लालच हमेशा नुकसान का कारण बनता है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *